बचपन
बचपन इसको कैसे बयां करू जो मेरा सब कुछ था जो सिर्फ एक जज्बात नहीं मेरे ज़िन्दगी की बुनियाद थी।
कुछ आयेशी बातें है कुछ आयेशी यादें है जो कभी भी मैं भूल नहीं सकता। मेरी बचपन की यादें जहाँ सब कुछ था। खुशियों , सुकून , लड़ाई , झगडे , दोस्ती, बड़े बड़े खवाब , हमारी पूरी फॅमिली जहाँ पर कोई फ़िक्र ना कोई परेशानी।
बचपन की वो दिन भी क्या खूब थे वो बचपन की शरारते वो छोटे छोटे बातें पर अपने दोस्तों के साथ लड़ जाना वो बिना फिक्र बारिश मैं खेलना , हर बात पर ज़िद करना , हर वो बातें मुझे याद है हर वो लम्हा मुझे याद है।
हर पल को पूरी तरह से जीना किसको कहते है वो सिर्फ मेरा बचपन था।
मुझे आज भी वो सिखाता है जब कभी मैं जीना भूल जाता हु मुझे याद दिलाता है।
मेरी रब से ये दुहा है की एक बार फिर से मुझे वो बचपन के कुछ पल दे दे। ताकि फिर से एक बार ही सही ख़ुशी से जी भर कर जी लू।
आज मैंने अपने जीवन की तस्वीर निकलवाई , सिर्फ बचपन की तस्वीर रंगीन नज़र आयी।
ले चल उसी बचपन में,
जहाँ न कोई ज़रूरी था ,
न कोई जरुरत थी।












